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ग्रेटर नोएडा: किसान एकता संघ ने प्राधिकरण को दिया ज्ञापन, समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी

संगठन के जिला अध्यक्ष अरविंद सैकेटरी ने बताया कि लंबे समय से किसानों की समस्याएं लंबित हैं, लेकिन प्राधिकरण के अधिकारी उनकी लगातार अनदेखी कर रहे हैं.

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  • 11 February 2026,
  • (अपडेटेड 11 फ़रवरी 2026, 01:36 AM)

किसान एकता महासंघ के कार्यकर्ताओं ने किसानों की लंबित समस्याओं को लेकर मंगलवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में ज्ञापन सौंपा. संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक बाली सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश कसाना के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी के नाम ओएसडी मुकेश कुमार को सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा.

संगठन के जिला अध्यक्ष अरविंद सैकेटरी ने बताया कि लंबे समय से किसानों की समस्याएं लंबित हैं, लेकिन प्राधिकरण के अधिकारी उनकी लगातार अनदेखी कर रहे हैं. ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने मांग की कि जिन गांवों की जमीन का अधिग्रहण हुए काफी समय बीत चुका है, वहां अब तक किसानों को 6 प्रतिशत आवासीय भूखंड नहीं दिए गए हैं. बादलपुर, बिसनूली, बिसरख, सुनपुरा, बिरोडा, बैदपूरा, रिठौड़ी और सिरसा सहित दर्जनों गांवों के किसानों को शीघ्र आवासीय भूखंड उपलब्ध कराए जाएं.

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि बिना आबादी सर्वे और नक्शा तैयार किए ही कई स्थानों पर 6 प्रतिशत आवासीय भूखंड ग्रामीण आबादी के बीच आवंटित कर दिए गए हैं, जिससे विवाद की स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे भूखंडों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित कर समस्या का समाधान करने की मांग की गई है.

ज्ञापन में खेती पर निर्भर मजदूरों और भूमिहीन किसानों को 100 वर्ग मीटर आवासीय भूखंड देने की मांग भी उठाई गई. साथ ही किसानों की पुरानी आबादियों का निस्तारण प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत सैटेलाइट सर्वे के आधार पर करने और जिन किसानों को लीज बैंक के पत्र मिल चुके हैं, उनके मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग रखी गई.

इसके अलावा किसानों ने प्राधिकरण क्षेत्र में स्थापित कंपनियों में स्थानीय किसानों के बच्चों को योग्यता के आधार पर रोजगार देने तथा शिक्षण संस्थानों में उनके लिए आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग की. ग्रामीण क्षेत्रों में बारात घर, खेल मैदान, मिनी स्टेडियम और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की भी मांग की गई.

किसान एकता महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर मांगों पर वार्ता कर समाधान नहीं निकाला गया तो संगठन धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा. इस दौरान कई किसान प्रतिनिधि और महिलाएं भी मौजूद रहीं.